जितेन्द्र भाटिया द्वारा अनूदित विश्व साहित्य शृंखला कथादेश पत्रिका में सोचो साथ क्या जायेगा शीर्षक से नियमित अंतराल पर प्रकाशित होती रही है जिसे सभी हिंदी पाठकों और विद्वानों ने मुक्त कंठ से सराहा है इस तीसरे खंड में मध्य एशिया और अफ्रीका की कहानियों को संकलित किया गया है जिनका चुनाव करने की प्रक्रिया के सम्बन्ध में जितेन्द्र जी कहते हैं — प्राधिकारिता के किसी भी दावे के बग़ैर इस आयोजन में कुछ ऐसी अपरिचित एवं विलक्षण रचनाओं को चुना गया है जो अपने समय की महत्त्वपूर्ण धरोहर होने के साथ-साथ हिन्दी के पाठक के लिए नयी भी हैं। इन सभी रचनाओं के चुनाव के पीछे जितेन्द्र जी की उपभोगतावाद, भूमंडलीकरण और फासीवाद के विरुद्ध दर्ज की जाने वाली मुखर आवाज़ों का परिचय हिंदी पाठकों से कराने की तीव्र चाहना सहज ही दृष्टिगोचर है
| Book Details | Publisher : Sambhavna Prakashan |
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