आधा दिखता वह आदमी

By: (Author)

395.00

  • एडिशन ‏ : ‎ पहला संस्करण
  • भाषा ‏ : ‎ हिंदी
  • प्रिंट की लम्बाई ‏ : ‎ 211 पेज
  • ISBN-10 ‏ : ‎ 9381619859
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9381619858
  • आइटम का वज़न ‏ : ‎ 400 g

‘आधा दिखता वह आदमी’ वरिष्ठ कवि सौमित्रा मोहन की संपूर्ण कविताओं का संग्रह है। वह न केवल एक महत्वपूर्ण कवि हैं, हिंदी की आधुनिक कविता के अकवितावादी आन्दोलन के शीर्ष कवियों में रहे हैं। इसलिए इन कविताओं से गुज़रना हिंदी काव्य-परम्परा के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के सामने होते हुए कविता के समकालीन परिवर्तनों को समझना भी है। चर्चित कविता लुकमान अली तथा अन्य कविताओं में अपने समय की विडंबनाओं के भीतर कवि-समय का वह रचाव है जिसमें समय अपने समूचे विद्रूप के साथ प्रकट होता है। लुकमान अली तो अपने समय को भेदता हिंदी कविता का काव्य-चरित्र बन गया है। ‘लुकमान अली’ अपने में स्पंदित होती हुई और समय को अतिक्रमित करने वाली वह कविता है जो काल-सापेक्ष तो है ही, भविष्योन्मुखी भी है। ऐसी ही कविता को एफ. आर. लीविस महत्वपूर्ण कविता कहते हैं क्योंकि ऐसी कविता अपनी सजगता के कारण स्वयं को दीर्घजीवी कर अपने सर्जक कवि को भी दीर्घजीवी बनाती है। अपने कुशल भाषिक रचाव में सौमित्रा मोहन समय और घटनाओं के बीच के अंतराल को जिस संवेदना में उठाते हैं और जिस तरह के बिंबों से उसे नया अर्थ देते हैं, वह हिन्दी कविता में उनकी महत्ता का सूचक बनता है। इन कविताओं में कहीं अतियथार्थ का स्वर है, तो कहीं यथार्थ का गहरा बोध। कहीं पारम्परिक काव्य-विन्यास की लयकारी है तो कहीं समकालीनता की बदशक्ल छवियों में अपने वर्तमान को देखने की तत्पर कविदृष्टि। गरज यह कि लगभग पचास वर्षों की काव्य-यात्रा में कवि ने जो बहुविध प्रयोग किए हैं और जिस तरह कविता को साधा है उनका यह संपूर्ण कृतित्व हिंदी कविता में उनकी सार्थक उपस्थिति का द्योतक तो बनता ही है, हिंदी की आधुनिक कविता की समृद्धि का पता भी देता है।

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