Patrkarita Ke Tappe, Dadra Aur Thumri

By: (Author)

150.00

  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Print length ‏ : ‎ 112 pages
  • ISBN-10 ‏ : ‎ 938161928X
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9381619285

सन् 1955 में दिल्ली में जन्मे राजीव की पढ़ाई-लिखाई दिल्ली, रायबरेली, हापुड़ और लखनऊ में हुई। अर्थशास्त्रा में एम ए की डिग्री हासिल करने वाले इस प्यारे बंदे ने दिल लगाया इतिहास, साहित्य, फिल्म, संगीत और पत्राकारिता से। रोजी-रोटी के लिए सरकारी नौकरी से शुरू करके नवभारत टाइम्स, जनसत्ता, हिन्दुस्तान, अमर उजाला, नई दुनिया समेत कुछ अन्य अख़बारों और बीआईटीवी एवं सहारा टीवी, आदि समाचार चैनलों में अपनी रचनात्मकता का लोहा मनवाया और कई दिल जोड़े-तोड़े। ख़ूब पढ़ने और डूब कर लिखने वाले खुशदिल लेकिन बेचैन राजीव ने हर विषय पर दिल-दिमाग़ खोलकर कलम चलाई। ‘बैहर में साइकिल’, ‘कबीरा—जो बचेगा कैसे रचेगा’ और ‘हमनवा’ पुस्तकें उसके पढ़ने-लिखने, दोस्तियों और मुहब्बतों की गहराई की गवाह हैं।
पिता वीरेंद्र कुमार और माता सरोज मित्तल का अकेला बेटा, मीरा का दुलारा भाई, पूर्णिमा का जीवन साथी, पुलक और शिवम का पिता, रुचिका का श्वसुर, कनि एवं कबीर का दादू और कई दोस्तों का चहेता राजीव अप्रैल 2021 की एक रात चुपके से दुनिया-ए-फानी से कूच कर गया।

नवीन जोशी

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