यह किताब बीते १०-१५ वर्षों की प्रक्रियाओं का जायज़ा लेने की कोशिश के बीच बनी है। पिछले कुछ वर्षों में लगातार घटती घटनाओं पर मैंने जो टिप्पणियाँ लिखीं, उनको एक साथ पढ़ें तो उनमें अपने समय का इतिहास झांकता है—वह इतिहास जिसे फ़िलहाल कोई दर्ज नहीं कर रहा, जिसमे वह वर्तमान शामिल है जो बिल्कुल बुलबुले की तरह आता और पार हो जाता है।

Jo Hindustan Hum Bana Rahe Hain
By: Priyadarshan (Author)
₹300.00
- Language : Hindi
- Print length : 189 pages
- ISBN-10 : 9382673660
- ISBN-13 : 978-9382673668




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