गगन गिलब्रजरतन जोशी की कविताओं के केन्द्र में जीवन है। वह जीवन धरती से आकाश तक भरा पड़ा है। उसकी पहचान पर्वत और आकाश, हवा और आग, समुद्र और तालाब, भाषा और व्यवहार में फैला पड़ा है। ….जिसके बिम्ब ब्रजरतन जोशी सुघड़ शब्दों के माध्यम से गढ़ते हैं।
श्रीप्रकाश मिश्र
इस संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता कविता के समकालीन मुहावरे से विरत होना है। जीवन के सजीवन स्रोतों की शिनाख़्त करते हुए उसका सहगान कवि का लक्ष्य है। कवि ब्रजरतन जोशी कविता की पक्षधरता के क्रम में जीवन के वजूद को एक सच्चे कवि की तरह प्रकृति दर्शन जैसे सभी स्रोतों को खंगालते हैं।उनकी अपनी कमाई भाषा है जो उन्हें समकालीनता के कुहरे से अलगाती है और मौलिक बनाती है।
सवाईसिंह शेखावत
कवि जिन्दगी को अपनी दार्शनिक दृष्टि से न केवल जाँचता-परखता है बल्कि उसे आत्मसात करता नज़र आता है कि साँसें ज़िन्दगी है, ज़िन्दगी साँसें है या उभय संपृक्त हैं। ….कवि और भाषा एक-दूसरे के पूरक हैं। जीवन की रचना और भाषा की संरचना में जो अन्विति है, कवि उसे व्यंजनात्मक दृष्टि से देखता है।
रत्नकुमार सांभरिया
ब्रज रतन जोशी जी ने बहुत सारी प्रेम कविताएँ एक पूरी श्रृंखला के रूप में लिखी हैं। उनके यहाँ प्रेम एंद्रिक रूप में नहीं दिखाई देता है, बल्कि उसका आध्यात्मिक स्वरूप दिखाई देता है। प्रेम में वह पाने की नहीं बल्कि समर्पित होने की लालसा रखते हैं। जोशी जी के लिए छूना महज एक क्रिया भर नहीं है, बल्कि छूकर अपना अधूरापन पूरा करना है। उनके लिए जीवन, मृत्यु और प्रेम की जुगलबंदी है। प्रेम की गहनता को अभिव्यक्त करने के लिए कवि जिन बिंबों, रूपकों और प्रतीकों का प्रयोग करते हैं, वे एकदम नए हैं।
महेश पुनेठा
ब्रजरत्न जोशी की कविताएँ विलंबित लय पर गति करती हैं। इस गतिकी में कविताएँ निर्मित नहीं होती बल्कि घटित होती हैं।
अमरेंद्र कुमार



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