तिथि दानी का रचना संसार एक बहुरंगी दृश्यों से सजी दुनिया है। उनका दुनिया देखने का और उस देखे हुए को अभिव्यक्त करने का लहज़ा हमारी पीढ़ी के अन्य कवियों से बहुत भिन्न है और उनकी यही बात उनकी कविताओं को एक ताज़ा और अनछुआ प्रभाव देती है। उनकी कविताओं को तो सिर्फ़ उनके अछूते और दिलचस्प डिक्शन के लिए भी पढ़ा जा सकता है उस पर एक-एक कविता जैसे एकाधिक रेखाचित्रों से भरा कैनवास है।
एक कवि के अतिरिक्त कौन दुख और सुख के फूलों और ऋतुओं को रंगों से भी रंजित शब्दों के माध्यम से कविता के कैनवास पर उतार सकता है।
तिथि की कविताओं में दुख बहुत बड़ा होकर आता है। उसकी भूमिका केवल दुखी करने की नहीं है वह सुख का शिशु भी है। वह जब आता है तो बहुत आत्मीयता से गले लगाता है, उसके जैसा कोई अंतरंग नहीं। दुख के निश्छल प्रेम की रोटी खाकर एक संवेदनशील व्यक्ति उसे एक वैश्विक ऊर्जा में परिवर्तित कर देता है
तिथि दानी की ये कविताएँ जो एक एकाकी आत्म के जीवन पथ पर बार-बार गिरकर उठ खड़े होने, धूल झाड़कर आगे बढ़ जाने के साहस को दर्ज़ करती हैं, निजी में सार्वभौमिक स्वर के लिए देर तक याद रखी जायेंगी।
अनुराधा सिंह




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