किरदार निभाते हुए नरेन्द्र मोहन की कविताओं की ग्यारहवी किताब है जिसकी पहली कविता का शीर्षक है — कविता मुझे बचा लो — एक विशद साहित्यिक अवदान के बाद भी कवि खुद को समर्पित करता है और गुहार भी लगाता है कविता के समक्ष इन शब्दों में : कंपकंपाती रूह / कल्पना काठ / कविता मुझे बचा लो / मेरे भीतर अपनी बेचैनियाँ भर दो इस किताब को उन्होंने चार भागों में विभक्त किया है — फैलते हुए सियाह हाशिये, मैं ही मरा हूँ आसपास, अमूर्त स्पर्श का सनसनाता अहसास और किरदार निभाते हुए ये चारों खंड हमें चार अलग अलग रचना समयों से गुजारते हैं— इन कविताओं में बेचैनी भरे शब्द की ध्वनियाँ है—वैचारिक मुठभेड़ है बदलाव की आकांक्षा के साथ बहुपरती संवेदना की मार्मिकता है

Kirdar Nibhate Hue
- Language : Hindi
- Print length : 140 pages
- ISBN-10 : 938161959X
- ISBN-13 : 978-9381619599
- Item Weight : 300 g
| Book Details | Language : Hindi |
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