यह किताब गिरिराज किशोर को लिखे गए पिछले पाँच दशकों के चुनिंदा पत्रों का संग्रह है — वे पत्र जो हिन्दी साहित्य के भीतर के अदृश्य संसार को खोलते हैं। इन चिट्ठियों में लेखकों के आपसी रिश्ते, संदेह, अनुरोध, प्रेम, ईर्ष्या और संघर्ष की सजीव झलक है। यह सिर्फ़ साहित्यिक इतिहास नहीं, बल्कि एक युग के मनोविज्ञान का दस्तावेज़ है। इन पत्रों के माध्यम से लेखक का निजी जीवन, उसकी रचनात्मक बेचैनी और समय से उसका संवाद उजागर होता है। यह किताब बताती है कि साहित्य सिर्फ़ कृतियों में नहीं, बल्कि उनके पीछे के जीवन में भी साँस लेता है। प्रियंवद ने इन पत्रों को जस का तस सुरक्षित रखते हुए, उनके संदर्भों के साथ एक ईमानदार साक्ष्य प्रस्तुत किया है — हिन्दी साहित्य के पचास वर्षों की असली, अनकही तस्वीर के रूप में।

कुछ अश्के जिगर
By: Priyanvad (Author)
₹750.00
- Print length : 524 pages
- ISBN-10 : 9382666575
- ISBN-13 : 978-9382666578


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