‘समय सीमांत’ इसी विषम समाज में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते पात्रों की एक आत्मीय कथा है। चालिस-बयालीस वर्षों में ये स्थितियां काफी हद तक बदल जानी चाहिए थी। लेकिन ‘समय सीमांत’ का सच आज भी उसी तरह हमारे साथ चल रहा है जहां चंद मुठ्ठी भर लोग अथाह सम्पत्ति के स्वामी बन चुके हैं और नीचे के तबके की आधी जनसंख्या पहले से कहीं अधिक विपन्न और खस्ताहाल दिखाई देने लगी हैं। जनसंख्या के विस्फोट और कमरतोड़ महंगाई ने इस समस्या को और भी गम्भीर बना दिया हैं। समाज में फैली यह विषमता आज शहरों से लेकर गांव तक हर जगह दिखाई देने लगी है।

समय सीमांत
By: Jitendra Bhatia (Author)
₹150.00
- प्रकाशक : Black Ibis Sambhavna Prakashan
- प्रकाशन की तारीख : 1 जनवरी 2019
- एडिशन : पहला संस्करण
- भाषा : हिंदी
- प्रिंट की लम्बाई : 128 पेज
- ISBN-10 : 9381619905
- ISBN-13 : 978-9381619902
- कंट्री ऑफ़ ओरिजिन : इंडिया
More from Sambhavna Prakashan
Related products
-
Uncategorized
सोचो साथ क्या जाएगा (चौथा खंड) — दक्षिण पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया
₹300.00 Add to cart


Reviews
There are no reviews yet.