बीसवीं शताब्दी के सबसे बड़े लेखकों में शुमार किये जाने वाले कोलंबियाई लेखक गाब्रीएल गार्सीया मारकेज़ ने पाब्लो नेरूदा को साहित्य का सम्राट मिडास कह कर संबोधित किया जिसके स्पर्श भर से हर शब्द निखालिस सोना बन गया। नेरूदा की प्रेम कविताओं की यह किताब 2024 में अपने प्रकाशन के सौ वर्ष पूरे कर रही है। संसार की सत्तर से भी अधिक ज़बानों में अनूदित हुई इस किताब की करोड़ों प्रतियाँ बिक चुकी हैं। चीले के एक सुदूर गाँव पराल से निकले बीस साल के युवा नेरूदा की इस किताब ने उन्हें रातों-रात दुनिया भर में शोहरत के शिखर पर बिठा दिया। प्रेम, दुःख, ऐंद्रिकता, पराजय और उम्मीद की इन कविताओं ने पिछली एक शताब्दी से प्रेम करने वाले दिलों के लिए ऊष्मा और रोशनी का काम किया है।

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