बिल्लियाँ दबे पाँव आती हैं—ज़िंदगी में भी और लेखन में भी। यह किताब उसी दबे पाँव आए बदलाव की कथा है।
गीताश्री की यह पुस्तक बिल्लियों पर लिखी गई कोई साधारण किताब नहीं है। इसमें 19 लेखकों और कलाकारों के वास्तविक, निजी और प्रत्यक्ष अनुभव संकलित हैं—ऐसे अनुभव, जिनमें बिल्लियाँ केवल पालतू जानवर नहीं, बल्कि रचनात्मक जीवन की मौन सहचर, प्रेरणा और आत्मीय साथी बनकर उपस्थित हैं।
किताब एक लेखिका की निजी यात्रा से शुरू होती है—बचपन के अंधविश्वासों, काली बिल्ली के भय और जीवन की एक गहरी त्रासदी से होकर गुज़रते हुए। धीरे-धीरे यह यात्रा दुनिया भर के लेखकों, चित्रकारों और विचारकों के बिल्ली-प्रेम तक फैलती है—जहाँ बिल्लियाँ स्वतंत्रता, रहस्य और सृजनशीलता का प्रतीक बन जाती हैं।
यह पुस्तक—
19 लेखकों और कलाकारों के सच्चे अनुभवों और संस्मरणों को सामने लाती है
बिल्लियों से जुड़े मिथकों, लोककथाओं और सांस्कृतिक इतिहास को समझती है
डर से मुक्ति और प्रेम की ओर बढ़ती एक संवेदनशील चेतना की कहानी कहती है
यह किताब उन पाठकों के लिए है जो साहित्य, कला, आत्मकथात्मक लेखन और मानवीय संवेदनाओं में रुचि रखते हैं। यह पुस्तक बताती है कि जैसे बिल्लियाँ पालतू होकर भी पालतू नहीं होतीं, वैसे ही उन्हें प्रेम करने वाले लोग भी स्वतंत्र आत्मा के होते हैं।
यह किताब बिल्लियों का महिमामंडन नहीं करती—यह उन इंसानों की कहानी है, जिन्हें बिल्लियों ने थोड़ा और मनुष्य बना दिया।

CAT CLUB
By: Gita Shree (Author)
₹295.00
- Publisher : Sambhavna Prakashan
- Publication date : 6 February 2025
- Edition : Classic Edition
- Print length : 202 pages
- ISBN-10 : 8193121740
- ISBN-13 : 978-8193121740
- Item Weight : 400 g
- Dimensions : 10 x 10 x 10 cm
- Country of Origin : India
- Net Quantity : 1 Piece
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