डॉ. सृजना राणा भूली (छोटी बहन) की किताब ‘गढ़वाली भाषा और साहित्य’ यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि गढ़वाली भाषा में कोई कमी नहीं है और गढ़वाली मानक भाषा के हर प्रतिमान को पूरा करने में सक्षम है। उम्मीद है कि ‘गढ़वाली भाषा और साहित्य’ नाम की यह पुस्तक गढ़वाली भाषा के लिए मील का पत्थर साबित होगी और गढ़वाली साहित्य के लिए प्रगति का मार्ग सुनिश्चित करेगी। इस किताब के लिए मेरी अनन्त शुभकामनाएं।
नरेन्द्र कठैत

Garhwali Bhasha Aur Sahitay
₹250.00
- ISBN-10 : 9382673679
- ISBN-13 : 978-9382673675
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