सीरज सक्सेना उन युवा भारतीय कलाकारों में से हैं जिन्होंने कला के नाते काफ़ी यायावरी की है। वे ऐसे कई कलाकेन्द्रों में गये हैं जहाँ जाने वाले वे शायद पहले भारतीय कलाकार होंगे। सीरज अपने क़िस्म के हिन्दी गद्यकार भी हैं: उन्होंने सूक्ष्मता के साथ इस यायावरी और प्रवास के दौरान सहज मानवीयता और संवेदनशील कला-बोध से परिवेश, सम्बन्ध, अनेक मानवीय भाव, दृश्य, संवाद आदि दर्ज किये हैं। हिन्दी में ऐसी डायरियाँ कलाकारों की तो दुर्लभ हैं ही, लेखकों तक की बहुत नहीं है। इस डायरी को उन बहुत सारे कलाकारों और क्षणों के रोचक और आत्मीय वृत्तान्त की तरह भी देखा जा सकता है जिन्हें जानने-समझने का हमें अन्यथा कोई अवसर नहीं हो सकता। इसलिए भी हमें रज़ा पुस्तक माला में यह पुस्तक प्रकाशित करते हुए प्रसन्नता है। —अशोक वाजपेयी

Kala Ki Jaghen
By: Siraj Saxena (Author)
₹375.00
- प्रकाशक : Sambhavna Prakashan
- प्रकाशन की तारीख : 1 जनवरी 2019
- एडिशन : पहला संस्करण
- भाषा : हिंदी
- प्रिंट की लम्बाई : 350 पेज
- ISBN-10 : 9381619972
- ISBN-13 : 978-9381619971
- पढ़ने की उम्र : 14 वर्ष और उससे अधिक
- आइटम का वज़न : 300 g
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