कुछ राब्ता है तुमसे — हिन्दी के प्रख्यात कवि, निबंधकार और विज्ञानवेत्ता प्रवीण प्रणव द्वारा लिखित यह अनूठा संग्रह हिन्दी, उर्दू और भोजपुरी साहित्य के अठारह महत्त्वपूर्ण रचनाकारों पर आधारित एक जीवनीपरक आलोचनात्मक कृति है।
इस पुस्तक में चंद्रधर शर्मा गुलेरी, भिखारी ठाकुर, जोश मलीहाबादी, सुभद्राकुमारी चौहान, महादेवी वर्मा, फ़ैज़, नागार्जुन, गोपाल सिंह नेपाली, कैफ़ी आज़मी, फणीश्वरनाथ रेणु, साहिर, नीरज, दुष्यंत कुमार, केदारनाथ सिंह, धूमिल, अदम गोंडवी, परवीन शाकिर और मख़्दूम मोहिउद्दीन जैसे रचनाकारों के जीवन, साहित्य और सामाजिक संदर्भों का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
🔹 प्रमुख विशेषताएँ: साहित्यकारों के कम-ज्ञात व्यक्तिगत प्रसंगों का भावपूर्ण विवरण
जीवनी और आलोचना का संतुलित मेल (Biographical Criticism)
सहज, सघन और प्रवाहपूर्ण भाषा
दुर्लभ चित्रों के साथ प्रस्तुति
हिन्दी, उर्दू और भोजपुरी के सांस्कृतिक संगम का दस्तावेज़
यह पुस्तक न केवल साहित्य शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए उपयोगी है, बल्कि आम पाठकों, युवा साहित्यप्रेमियों और कविता-पारखी जनों के लिए भी अत्यंत रोचक और ज्ञानवर्धक है।
यदि आप भारतीय साहित्य, कविता, या लेखक-जीवन की परतों में उतरना चाहते हैं — तो यह पुस्तक आपके लिए है।
प्रसिद्ध कवि अरुण कमल ने इस किताब के बारे में कहा “कवि, निबंधकार और विज्ञानवेत्ता श्री प्रवीण प्रणव की पुस्तक ‘कुछ राब्ता है तुमसे’ एक विलक्षण निबंध संग्रह है। प्रवीण जी का विशद अध्ययन, कविता से गहन प्रेम और गहराई में जाने की क्षमता हमें चकित कर देती है। इस पुस्तक का हर लेख जीवनी भी है और समालोचना भी, यानी जीवनीपरक आलोचना (बायोग्राफिकल क्रिटिसिजम)। और यह दुष्कर कार्य प्रवीण जी ने बहुत सहज और भावप्रवण भाषा में किया है जो पाठक को लगातार बाँधे रखती है। कहीं भी न तो शिथिलता है, न अवांछित विस्तार। इतना कर्मठ, कसा हुआ गद्य विरल है। ऐसी रोचक, ज्ञानवर्द्धक और सघन पुस्तकें कम लिखी जाती हैं। यह किताब न केवल साहित्य अध्येताओं बल्कि सामान्य पाठक और किशोरों के लिए भी उपादेय है।”



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