Lautunga usi gulaab tak

495.00

  • Print length ‏ : ‎ 284 pages
  • ISBN-10 ‏ : ‎ 9382673776
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9382673774
  • Item Weight ‏ : ‎ 500 g
  • Net Quantity ‏ : ‎ 1 Piece

लौटूँगा उसी गुलाब तक में महमूद दरवेश की लगभग सभी अहम कविताओं को हिंदी पाठकों के लिए सुलभ और प्रवाहपूर्ण तरीके से अनुदित किया गया है। इस संग्रह में दरवेश की गहराई, संवेदना और क्षण-विशिष्ट सौंदर्य हिंदी में नए सिरे से उभरते हैं, जिससे पाठक मूलभावों के बेहद करीब आ जाते हैं।

अनुवादक अशोक पांडे ने स्रोत भाषा के अर्थ, ध्वनि और musicality को बरकरार रखते हुए हिंदी पाठक के लिए एक सहज और प्रभावी रीडिंग-एडवेंचर बनाईं है। हर कविता में उन्होंने वही आवाज़ बनाए रखी है जो दरवेश ने अपने समय-चरित्र और आत्म-चिन्तन में रचा है।
इस पुस्तक को क्यों पढ़ें?

यदि आप विश्व साहित्य में रुचि रखते हैं।
यदि आप कविता के माध्यम से इतिहास, राजनीति और मानवीय संवेदनाओं के गहरे संबंध को समझना चाहते हैं।
यदि आप हिंदी में उत्कृष्ट अनुवाद साहित्य पढ़ने के शौकीन हैं।
यदि आप महमूद दरवेश की काव्य-यात्रा से रूबरू होना चाहते हैं, लेकिन मूल भाषा न आने की वजह से नहीं पढ़ पाए। किताब की खास बातें

उच्च-गुणवत्ता चयन: दरवेश की प्रमुख कविताओं का एकीकृत चयन।
कविता-भाषा की रागात्मक ध्वनि हिंदी में जीवंत रूप से उभरती है, ताकि पाठक को संगीत-सा अनुभव मिले।
प्रेम, विरह, अस्तित्व, और दार्शनिकता की जटिलताओं को सहज और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करता है।
साफ़-सुथरे पन्ने, सुगम फॉन्ट, और सुविचारित अनुवाद-चयन—एक सुखद पठन-अनुभव के लिए।
अगर आप महमूद दरवेश के गहरे प्रेम-रसायन, दार्शनिक सवालों और संगीत-सी लय की तलाश में हैं, तो यह संग्रह आपके लिए है।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Lautunga usi gulaab tak”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top