Naam Nahin

By: (Author)

300.00

  • एडिशन ‏ : ‎ पहला संस्करण
  • भाषा ‏ : ‎ हिंदी
  • प्रिंट की लम्बाई ‏ : ‎ 272 पेज
  • ISBN-10 ‏ : ‎ 9381619506
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9381619506

गिरधर राठी उन कवियों में से हैं जिन्होंने असाधारण रूप से इस निहायत ऊलजलूल मगर बेहद दिलकश दुनिया में अपनी व्यर्थता का थोड़ा-बहुत अर्थ अपनी कविता से ही पाने की कोशिश की है। उनकी कविता अगर एक ओर आत्मान्वेषण की है तो दूसरी ओर वह दुनिया की भयावहता और क्रूरता को दर्ज भी करती रही है। उसका अधिकांशतः शान्त स्वर उसकी अचूक नैतिक हिस्सेदारी के भाव के साथ हमारे बेहद बड़बोले समय में थोड़ा अलग रहा है। उन्होंने ‘जितना दिखा है/समझना उतना ही’ पर इसरार किया है क्योंकि कई गहरे अर्थों में वे एक निराकांक्षी कवि हैं। रज़ा पुस्तक माला में उनकी सम्पूर्ण कविताओं को एकत्रा प्रकाशित करने में हमें प्रसन्नता है। —अशोक वाजपेयी

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