JIVAN KO MAINE PAHNA HI NAHIN

By: (Author)

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  • प्रकाशक ‏ : ‎ Kie Publication
  • प्रकाशन की तारीख ‏ : ‎ 1 जनवरी 2017
  • एडिशन ‏ : ‎ पहला संस्करण
  • भाषा ‏ : ‎ हिंदी
  • प्रिंट की लम्बाई ‏ : ‎ 256 पेज
  • ISBN-10 ‏ : ‎ 9381623015
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9381623015
  • आइटम का वज़न ‏ : ‎ 300 g
  • आकार ‏ : ‎ 22 x 19 x 4 cm
  • सामान्य नाम ‏ : ‎ पुस्तक

ये कविताएँ जब लिखी गयीं, तब मनोदशा दुख, विषाद और भय से व्याप्त थी— यह भौतिक जगत था और मेरा अपना फिजिकल अस्तित्व जिसे सहन करना दुष्कर हो गया था — मैं काले आवर्तों के अंदर थी — जगत मुझे एक सत्ता के रूप में प्रत्यक्ष दिखाई था — एक काले सागर के रूप में शायद यही शास्त्रों का भवसागर था — मैं इसके प्रति घोर वितृष्ण और ग्लानि से ग्रस्त थी, निस्तार का कोई उपाय मेरे पास नहीं था — यह समय के बीते हुए कल की दीर्घकालिकतामें अपने इसी रूप में जीवित था — इतिहास एक अनुवर्तित पन्ना था और कुछ नहीं — अमृता भारती

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