प्यास से मरती एक नदी

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  • प्रकाशक ‏ : ‎ Sambhavna Prakashan
  • प्रकाशन की तारीख ‏ : ‎ 1 जनवरी 2020
  • एडिशन ‏ : ‎ पहला संस्करण
  • भाषा ‏ : ‎ हिंदी
  • प्रिंट की लम्बाई ‏ : ‎ 470 पेज
  • ISBN-10 ‏ : ‎ 8194740525
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 978-8194740520
  • पढ़ने की उम्र ‏ : ‎ 10 वर्ष और उससे अधिक
  • आइटम का वज़न ‏ : ‎ 500 g
  • आकार ‏ : ‎ 12 x 19 x 5 cm

दशकों पहले मध्यप्रदेश के एक क़स्बे पिपरिया से हिन्दी कवि वंशी माहेश्वरी ने अपने ही साधनों से एक छोटी पत्रिका निकाली ‘तनाव’। उसमें अन्य सामग्री के अलावा अनुवाद पर विशेष आग्रह था। धीरे-धीरे पूरी पत्रिका ही विश्व कविता के अनेक कवियों के हिन्दी अनुवाद पर एकाग्र हो गयी। यह न सिर्फ़ हिन्दी में अभूतपूर्व घटना थी, पर शायद समूची भारतीय कविता में भी। विश्व कविता का हिन्दी अनुवाद में यह सबसे बड़ा संचयन है। संचयन में लगभग ३३ देशों की २८ भाषाओं के १0३ कवियों की कविताओं के, ४८ कवियों व विद्वानों द्वारा किये गये, हिन्दी अनुवाद शामिल हैं। यह अत्यन्त मूल्यवान् सामग्री पत्रिका के रूप में खो न जाये इस ख़्याल से हमने वंशी माहेश्वरी से आग्रह किया कि वे अब तक ‘तनाव’ में प्रकाशित सभी अनुवादों से चयन कर उन्हें तीन खण्डों में पुस्तकाकार एकत्रा और संयोजित कर दें। वंशी चित्राकार सैयद हैदर रज़ा के निकट भी रहे हैं और उनसे एक लम्बा पत्राचार उनका होता रहा है। विश्व कविता का यह अनोखा संचयन प्रस्तुत करते हुए हमें प्रसन्नता है। उम्मीद है कि रसिक वर्ग संसार में कविता का शैली, रूपाकार, कथ्य, शिल्प में जो अपार बहुलता, वैभव और विस्तार है उसे हिन्दी में अनुभव कर पायेगा। यह पहचान भी निश्चय ही उभरेगी कि हिन्दी कितनी आतिथेय भाषा है और कई बार अनुवाद के क्षणों में वह वहाँ जाने की कोशिश करती और जोख़िम उठाती है जहाँ वह पहले शायद कभी नहीं गयी थी। — अशोक वाजपेयी

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