Aawaaz Alag Alag Hai

By: (Author)

150.00

  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Print length ‏ : ‎ 128 pages
  • ISBN-10 ‏ : ‎ 9392621043
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9392621048

विनोद पदरज कविता के विरल साधक हैं। वे मुक्त-छंद के दौर में छंद-प्रवीण कवि हैं। विनोद को यदि किसी एक चीज़ का कवि कहा जाए तो वे जीवन के कवि हैं। उनकी कविताओं में उनकी धरती, उनके लोग, उनकी वनस्पतियाँ, उनका आकाश सब बहुत ठोस रूप से मौज़ूद हैं । विनोद जीवन और धरती में गहरे धंसे हुए कवि हैं । — कृष्ण कल्पित

त्रिलोचन विनोद जी के प्रिय कवि हैं किन्तु त्रिलोचन की आधुनिकता प्रश्नांकित हैं, विनोद की असंदिग्ध। उनकी कविता मेरे लिए चुनौती बनी हुई है।— राजाराम भादू

विनोद पदरज की कविता अपनी अंतिम अभीष्ट पंक्तियों तक पहुँचते हुए जो संक्षिप्त, मार्मिक और संवेदित यात्रा करती है, वही इसका वास्तविक हासिल है। —कुमार अम्बुज

लोक के भीतर लोक की थाह लेने वाली कविताएँ हैं विनोद पदरज की।— सत्यनारायण

विनोद पदरज की कविताओं में कुछ भी दिखावे का नहीं है। और शायद इसीलिए उनके यहाँ शिल्प और संवेदना का चालू मुहावरा भी नहीं है। मुझे लगता है कि इन कविताओं में जीवन के जो चित्र, स्थितियाँ और प्रसंग आए हैं, उन्हें बैठे-ठाले, अभ्यास या तकनीक के दम पर हासिल नहीं किया जा सकता है। — नरेश गोस्वामी

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