जिधर से सूरज उगता है!
यानी यात्राएँ पूर्व के ऐसे प्रदेश की, जो बहुत करीब होते हुए भी आज तक हमारे लिए अपरिचित और रहस्यमय है! सिक्किम से उत्तरी बंगाल, उत्तर-पूर्व, भूटान, बांग्लादेश और उससे आगे मयनमार तक फैला हमारे देश का पूर्वी इलाक़ा अनोखी सभ्यताओं का उदगम क्षेत्र होने के बावजूद आज भी कई रहस्यों और अनकही वर्जनाओं से घिरा हुआ प्रदेश है। इसका इतिहास, इसकी संस्कृति, इसका पर्यावरण और इसका जीवन कई अलग-अलग प्रांतों, देशों और राजनीतिक चाहरदीवारियों में बँटा होने के बावजूद एक सी सहभागिता के कई अनकहे सूत्रों में बंधा हुआ है, जिसके समूचे स्वरूप को लेकर आज तक शायद ही कभी कुछ लिखा गया होगा।
कई वर्षों के फ़ासले पर, बेतरतीब ढँग से संपन्न हुई ये यात्राएँ दूसरों से भी अधिक, स्वयं अपनी समझ में इज़ाफ़़ा करने और उस एकसूत्रता तक पहुँचने का प्रयास हैं। ये सफ़रनामे यात्रा के साथ-साथ संस्कृति और राजनीति के पूर्वाख्यान भी हैं, क्योंकि इन्हें समझे बग़ैर किसी भी यात्रा से टूरिस्ट गाइड की इकहरी समझ से ऊपर उठने की उम्मीद नहीं की जा सकती! लेकिन इस सब के बावजूद किसी खानाबदोश की सी बेचैनी से जन्मी इन यात्राओं का गणित या कि इनका कुल-जमा-हासिल तय कर पाना मुश्किल होगा।




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