Kharij Log

By: (Author)

100.00

  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Print length ‏ : ‎ 70 pages
  • ISBN-10 ‏ : ‎ 939262140X
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 978-9392621406

यह समय लगभग हर स्तर पर व्यस्त और बेचैनी से भरा हुआ है। ऐसे में भारी-भरकम उपन्यास के लिए लगातार असुविधा बढ़ती जा रही है। ऐसा लग रहा है कि एक हज़ार, डेढ़ हज़ार पन्नों के उपन्यासों का दौर मद्धम पड़ गया है। दुनिया भर में उपन्यास, उपन्यासिका के बाद अब और छोटे नॉवेलेट का दौर शुरू हो गया है। इसमें अग्रणी भूमिका में जापान है जहाँ ऐसे नॉवेलेट को लिटरेरी ब्रिलियेन्स की तरह देखा जा रहा है। इसमें काज़ुफुमी शिरायशी के 58 पृष्ठों के नॉवेलेट से लेकर सोजी शिमादा के 108 पृष्ठों तक के नॉवेलेट शामिल हैं। वहाँ इसे गद्य की एक नई परिघटना की तरह लिया जा रहा है। इसे लेकर रेड सर्कल मिनीज़ नाम की एक शृंखला भी सामने आई है, इसमें जापान के समकालीन श्रेष्ठ लेखकों की कृतियाँ छापी जा रही हैं।
मेरी इस पुस्तक को भी मैं इसी तरह का गद्य मानती हूँ।
क़िस्सों से भरपूर, तीव्र, रोचक और गाढ़ी स्मृतियों से बना एक नॉवेलेट, पता नहीं नॉवेलेट को हिन्दी में क्या कहा जाएगा, शायद लघुन्यासिका। मेरा यह गद्य भारत की अपनी भूमि और लोगों की, उनके सपनों, हताशा और उत्सव की गाथा है। रोज़ की स्मृतियों से बुनी एक कथा। एक शहर जो इस कहानी का मुख्य पात्रा है, उसके बनने बिगड़ने और बदलने की कथा। आशा है लोगों को यह किताब पसन्द आएगी।

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